दिव्यांशु राठौर की रिपोर्ट
शंभुगंज ( बांका): प्रखंड क्षेत्र में सरकार एक तरफ जल जीवन और हरियाली अभियान चलाकर मृत हो रहे तालाब एवं कुएं की खोज कर कायाकल्प करने का काम कर रही है। वही दूसरी ओर सरकार के इस जनकल्याणकारी योजनाओ पर असमाजिक तत्व ग्रहण लगा रहे हें । ऐसा ही एक मामला गुलनी पंचायत के वार्ड संख्या चार के महादलित बस्ती में सामने आया है। दरअसल उक्त वार्ड में पेयजल की समस्या देख करीब तीन दशक पहले जनप्रतिनिधियों एवं बुद्धिजीवियों द्वारा सरकारी जमीन पर एक कुआं की खोदाई करवाया ।महादलित बस्ती के लोग कुआं का उपयोग करने लगे । पेयजल के साथ - साथ लोग खेत पटवन कर खेती भी करने लगे । फिर बाद में बाल विकास परियोजना द्वारा आंगनवाड़ी केन्द्र भी बनाया गया । बस्ती में पीएचइडी विभाग द्वारा चापानल लग जाने से धीरे धीरे कुएं का उपयोग कम हो गया । कुआं पर असमाजिक तत्वों का जमघट लगना शुरू हां गया | पानी का उपयोग नहीं होने से कुआं जीर्ण शीर्ण हो गया । करीब छह माह पूर्व पीएचइडी विभाग द्वारा जल जीवन हरियाली योजना के तहत करीब एक लाख की लागत से कुआं का कायाकल्प हुआ । जिसमें कूंए का रंग-रोगन कर लोहे का जाली भी लगाया गया ताकि पानी गंदा नहीं हो । जीर्णोद्धार के एक - दो माह तक तो ठीक रहा , लेकिन फिर से पुराना खेल शुरु हो गया | मौजूदा स्थिति है कि कुंआ शराब और नशीली दवा की बोतलों से भर गया है। जिससे कुंआ का पानी दूषित हो गई है। महादलित बस्तीवासी इन नशेड़ियों का विरोध कर नहीं पाते है और चुप रहने में ही भलाई समझते हैं। बस्ती के लोगों ने इसकी शिकायत विभाग से किया , लेकिन विभाग पर इसका कोई असर नहीं पड़ा । इस संबंध में पंचायत के मुखिया मीनू सिंह ने बताया कि गुलनी पंचायत नशेड़ियों का हब बन गया है। इस पर अंकुश लगाने के लिए थाने के अलावे कई बार पंचायत समिति सदस्यों की बैठक में भी उठाया | इसके बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई । पीएचइडी विभाग के जेई मिंटू कुमार ने बताया कि कुंआ की साफ-सफाई रखना तो सभी ग्रामीणों का काम हैं।
