छठ घाट को नही मिलता सरकारी व्यवस्था

बांका: चांदन प्रखंड मुख्यालय का सबसे प्रमुख छठ घाट कलुआ छठ घाट को माना जाता है। यहां कई हजार लोग उपस्थित होते हैं। जिसमें कुछ झारखंड से व्रती भी सपरिवार यहां आकर भगवान भास्कर को अर्घ्य देते हैं। लेकिन आज तक इस घाट पर सरकार की ओर से किसी प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं होती है। सारी व्यवस्था यहां के स्थानीय वेलफेयर सोसाइटी द्वारा किया जाता है। जिसके सदस्य चंदा वसूली कर तोरण द्वार, बिजली की व्यवस्था, के साथ छठ घाट जाने की व्यवस्था और दूध सहित अन्य चीजों की व्यवस्था करते हैं। जिसमें स्थानीय लोगों का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसके अलावे बेह्नगा घाट,नावाडीह घर,गोविंदपुर घाट,गोंडा घाट,सहित अन्य ग्रामीण घाट पर भी छठ व्रती भगवान को अर्घ देते है। सरकारी व्यवस्था में सिर्फ घाट का निरीक्षण भर ही होता है। इतना ही नहीं कलुआ घाट  तक जाने के लिए चार  वर्ष पूर्व तत्कालीन मुखिया छोटन मंडल द्वारा पुल का निर्माण शुरू किया गया था जो आज तक पूरा नहीं हो सका है। जिससे व्रती को पक्की सड़क से घाट तक जाने के लिए उबड़ खाबड़ और पथरीले रास्ते से जाना पड़ता है। हर वर्ष इस पुलिया के पूरा होने की का आश्वासन दिया जाता है। लेकिन एक मुखिया के बाद दूसरा मुखिया बदल गया पर पुल का निर्माण पूरा नहीं हो सका। पिछले वर्ष स्थानीय अधिकारी के अलावे विधायक मनोज यादव द्वारा भी इस पुलिया के निर्माण पर बल दिया गया था। लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। इस वर्ष भी सरकारी उदासीनता और पंचायत प्रतिनिधियों की लापरवाही से व्रती को उसी रास्ते से घाट तक जाना होगा। इस संबंध में वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष राकेश कुमार ने बताया कि सारी व्यवस्था हम लोग अपने स्तर से करते हैं। सरकार की ओर से आज तक कोई व्यवस्था नहीं की गई। वही बीडीओ राकेश कुमार ने बताया कि पुलिया के निर्माण पूरा क्यो नही हो सका है। इस पर जांच के बाद इसे पूरा करा दिया जाएगा।


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