धुमधाम से मनाई गई ' साबित्री बाई फुले' की जयंती

धुमधाम से मनाई गई ' साबित्री बाई फुले' की जयंती

चम्पारण नीति / बेतिया (प.च.) सावित्रीबाई फुले की जयंती धूमधाम से मनाई गई ।
 जिला मुख्यालय के ईलम राम चौक स्थित "पंचशील बौद्ध बिहार" में रविवार को राष्ट्रमाता सावित्रीबाई फुले की जयंती धूमधाम से मनाई गई जिसमें कई वक्ताओं ने अपनी -अपनी बातों को रखा तथा उनसे सीख लेने की जरूरत बताई। इस अवसर पर पंचशील बौद्ध विहार के संचालक रिटायर्ड डीएसपी रामदास बौद्ध ने कहा कि सावित्रीबाई फूले ने महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांति की शुरुआत की। उन्होंने बालिकाओं के लिए प्रथम विद्यालय की स्थापना की जिसमें कई बालिकाओं ने अपना नामांकन कराया और उस समय शिक्षा के क्षेत्र में एक नया कदम बढ़ाया । उनसे हमें सीखने की जरूरत है । वहीं दूसरी ओर कवि डॉक्टर गोरख प्रसाद मस्ताना ने कहा कि महिलाओं के जीवन में शिक्षा का अलख जगाने वाली सावित्रीबाई फुले थी। जिन्होंने महिलाओं के जीवन में शिक्षा की ज्योत जगाई ।जबकि उषा बौद्ध ने कहा कि आज की महिलाओं को सावित्रीबाई फुले से सीख लेने की आवश्यकता है। आज जो महिलाओं को अधिकार मिला है वह सावित्रीबाई फुले की ही देन है। जबकि समाजसेवी नंदलाल ने कहा कि राष्ट्र माता सावित्रीबाई फुले समाज में महिलाओं को शिक्षा देकर एक आमूल चूल परिवर्तन लाया तथा महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया। वहीं ओबीसी- दलित एकता मंच के संजय कुमार राव ने कहा कि राष्ट्र माता सावित्रीबाई फुले ने सर्वप्रथम महिलाओं को शिक्षा देने का काम किया और कई कठिनाइयों को झेलते हुए उन्होंने विद्यालय की स्थापना की ।कहा तो यह भी जाता है कि शिक्षा देने के क्रम में उनकी साड़ी पर कीचड़ भी फेंका जाता था और भद्दी- भद्दी गालियां भी दी जाती थी ।उसके बावजूद भी उन्होंने अपना शिक्षा देने का कार्यक्रम जारी रखा और महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर शिक्षक राकेश फूले, रिटायर्ड इंस्पेक्टर नेतराम, आशा बौद्ध ,राकेश साह ,नंदलाल, पप्पू कुमार सहित कई अन्य उपस्थित रहे तथा अपनी बातों को रखा।

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