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​रजौन ,बांका :-तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध दीपनारायण सिंह महाविद्यालय भूसिया, रजौन में चल रहा विवाद अब और उग्र होता जा रहा है। विगत शुक्रवार (10 जुलाई) से शुरू हुई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आज तीसरे दिन रविवार (12 जुलाई 2026) को भी लगातार जारी रही। इस बीच रजौन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से आए स्वास्थ्य कर्मियों की टीम ने रविवार को भी अनशन स्थल पहुंचकर हड़ताल पर बैठे अनशनकारियों के स्वास्थ्य की जांच की और आवश्यक चिकित्सा परामर्श दिया। महाविद्यालय के तृतीय वर्गीय कर्मचारी कन्हैया लाल सिंह अपने दर्जनों समर्थकों के साथ परिसर में डटे हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह पूरा आंदोलन मुख्य रूप से उनकी 4 सूत्री मांगों पर ही आधारित है, जिससे वे किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इन मांगों में महाविद्यालय में हो रहे बड़े पैमाने पर वित्तीय गबन की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करना, पूर्व में बिना किसी विज्ञापन के और मानकों की अनदेखी कर संविदा पर की गई सभी असंवैधानिक नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करना, कॉलेज के लिए अपनी जमीन दान करने वाले भूमिदाता के परिवार के किसी योग्य वंशज को महाविद्यालय में बहाल करना और कॉलेज की शासी निकाय (Governing Body) में भूमिदाता को सदस्य के रूप में शामिल कर उन्हें उचित सम्मान देना शामिल है। कन्हैया लाल सिंह का कहना है कि पिछले वर्ष नवंबर 2025 में भी प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में उन्हें लिखित आश्वासन देकर अनशन तुड़वाया गया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उस समझौते पर कोई अमल नहीं हुआ। इसी वादाखिलाफी के कारण उन्हें दोबारा इस विपरित परिस्थितियों में तीसरे दिन भी अनशन पर बैठना पड़ा है। इस आंदोलन में उनके साथ पवन वर्मा, मनोज वर्मा, पूर्व मुखिया संदीप कुमार सिंह, संजीव कुमार सिंह, सुनील वर्मा, गौतम सिंह, राम प्रकाश यादव, सुनील कुमार सिंह, रासबिहारी वर्मा, संतोष कुमार, कृष्ण कुमार, मनीष वर्मा, रोहित वर्मा, आदित्य कुमार वर्मा, सोनू पासवान, प्रवीण कुमार वर्मा, सुबोध कुमार सिंह और शशि भूषण चौधरी सहित दर्जनों समर्थक मजबूती से डटे हुए हैं। दूसरी ओर कॉलेज प्रशासन ने इस आंदोलन को 'अनुशासनहीनता' और 'शैक्षणिक वातावरण बिगाड़ने का प्रयास' करार दिया है। प्रभारी प्राचार्य डॉ. महेंद्र प्रसाद सिंह ने कुलपति को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि कन्हैया लाल सिंह वर्ष 2018 से कॉलेज से अनुपस्थित रहने के बावजूद डरा-धमकाकर जबरन वेतन उठा रहे हैं और कार्यालय के अन्य कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे हैं। प्राचार्य ने यह भी साफ कर दिया कि वर्तमान में शासी निकाय भंग होने के कारण उनके पास कोई नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। रविवार को तीसरे दिन भी गतिरोध बने रहने के कारण कॉलेज में प्रशासनिक संकट और गहरा गया है।
रिपोर्ट :- केआर राव 

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