डीएन सिंह कॉलेज में फिर बढ़ा विवाद: 4 सूत्री मांगों को लेकर कन्हैया लाल सिंह दोबारा भूख हड़ताल पर, प्राचार्य ने लगाया अनुशासनहीनता का आरोप

​रजौन ,बांका :- तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध दीपनारायण सिंह महाविद्यालय भूसिया, रजौन में विवाद एक बार फिर गहरा गया है। विगत वर्ष 27 नवंबर 2025 को शासी निकाय की आगामी बैठक में अवैध नियुक्तियों को निरस्त करने के लिखित आश्वासन के बाद स्थगित हुई भूख हड़ताल शुक्रवार (10 जुलाई) से दोबारा शुरू हो गई है। महाविद्यालय के तृतीय वर्गीय कर्मचारी कन्हैया लाल सिंह अपने दर्जनों समर्थकों के साथ 4 सूत्री मांगों को लेकर पुनः अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं, जिसके बाद कॉलेज प्रशासन ने भी उनके खिलाफ कड़ा मोर्चा खोल दिया है। भूख हड़ताल पर बैठे कन्हैया लाल सिंह ने बिहार के कुलाधिपति सह राज्यपाल को एक पत्र भेजा है, जिसमें सैंकड़ों लोगों के हस्ताक्षर शामिल हैं। हालांकि राज्यपाल को भेजे गए पत्र में 11 बिंदुओं को शामिल किया गया है, लेकिन कन्हैया लाल सिंह इस आंदोलन में मुख्य रूप से 4 मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। कन्हैया लाल सिंह के अनुसार महाविद्यालय में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और धांधली हो रही है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही पूर्व में बिना विज्ञापन और यूजीसी मानकों की अनदेखी कर संविदा पर की गई असंवैधानिक बहाली को तत्काल रद्द किया जाए। उनकी यह भी मांग है कि कॉलेज के भूमिदाता के योग्य वंशज की बहाली की जाए और भूमिदाता को शासी निकाय में सदस्य के रूप में शामिल किया जाए। कन्हैया लाल सिंह का कहना है कि पूर्व में जब उन्होंने आंदोलन किया था, तब कॉलेज प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों की मौजूदगी में लिखित आश्वासन देकर उनका अनशन तुड़वाया गया था, लेकिन इतने महीने बीत जाने के बाद भी उस लिखित समझौते पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और मामला जस का तस पेंडिंग पड़ा रहा, जिसके कारण वे दोबारा इस निश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी ये मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका यह अनशन लगातार जारी रहेगा। इस आंदोलन में कन्हैया लाल सिंह के नेतृत्व में पवन वर्मा, मनोज वर्मा, पूर्व मुखिया संदीप कुमार सिंह, संजीव कुमार सिंह, सुनील वर्मा, गौतम सिंह, राम प्रकाश यादव, सुनील कुमार सिंह, रासबिहारी वर्मा, संतोष कुमार, कृष्ण कुमार, मनीष वर्मा, रोहित वर्मा, आदित्य कुमार वर्मा, सोनू पासवान, प्रवीण कुमार वर्मा, सुबोध कुमार सिंह और शशि भूषण चौधरी सहित दर्जनों समर्थक मुख्य रूप से उपस्थित होकर आंदोलन को अपना समर्थन दे रहे हैं। दूसरी ओर कॉलेज प्रशासन ने इस आंदोलन को पूरी तरह से 'अनुशासनहीनता' और 'शैक्षणिक वातावरण बिगाड़ने का प्रयास' बताते हुए कन्हैया लाल सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रभारी प्राचार्य डॉ. महेंद्र प्रसाद सिंह ने कुलपति को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि कन्हैया लाल सिंह वर्ष 2018 से कॉलेज से अनुपस्थित रहने के बावजूद प्राचार्य को डरा-धमकाकर जबरन वेतन ले रहे हैं और कार्यालय के अन्य कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे हैं। प्राचार्य ने बताया कि 9 जुलाई को हुई कॉलेज कर्मियों की बैठक में इस भूख हड़ताल की निंदा करते हुए उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की सहमति बनी है। वहीं प्रशासनिक लाचारी जताते हुए प्राचार्य ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में शासी निकाय भंग होने के कारण उनके पास इस मामले में कोई भी नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार नहीं है, जिससे फिलहाल कॉलेज में यह गतिरोध पूरी तरह बरकरार है।

रिपोर्ट :- केआर राव 

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