रजौन, बांका :-तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से संबंधित दीपपनारायण सिंह महाविद्यालय भूसिया, रजौन में चल रहा गतिरोध चौथे दिन और गंभीर हो गया है। स्थानीय स्थानीय अधिकारियों और कॉलेज प्रशासन की बेरुखी के बीच विगत शुक्रवार (10 जुलाई) से अपने विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे तृतीय वर्गीय कर्मचारी कन्हैया लाल सिंह की तबीयत सोमवार को अचानक काफी बिगड़ गई। अनशन स्थल पर मुस्तैद स्वास्थ्य कर्मियों की टीम ने उनकी गिरती सेहत और गंभीर स्थिति को देखते हुए सोमवार की संध्या को उन्हें स्लाइन (ग्लूकोज) चढ़ाया। कन्हैया लाल सिंह अपने दर्जनों समर्थकों के साथ बिना अन्न-जल ग्रहण किए अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। इस बीच आंदोलनकारी कर्मचारियों को सहानुभूति और नैतिक समर्थन देने के लिए कई प्रमुख हस्तियां अनशन स्थल पर पहुंचीं। आंदोलन को मजबूती देने के लिए बिहार अंगिका अकादमी, पटना के निवर्तमान अध्यक्ष प्रो. डॉ. लखन लाल सिंह "आरोही" और आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष ई. नंदलाल यादव विशेष रूप से कॉलेज पहुंचे। इस दौरान महाविद्यालय के संस्थापक सदस्य सह मुख्य भूमिदाता स्वर्गीय दीपनारायण सिंह के पौत्र सचिन कुमार भी मौके पर मौजूद थे, जिससे आंदोलनकारियों का हौसला और बढ़ गया है। उल्लेखनीय है कि स्वर्गीय दीपनारायण सिंह को अपना कोई पुत्र नहीं था और सचिन कुमार उनके भाई स्वर्गीय काली प्रसाद सिंह के पुत्र निरंजन सिंह के बेटे हैं, जो इस न्याय की लड़ाई में कर्मचारियों के साथ खड़े नजर आए। अनशन स्थल पर पहुंचे प्रो. डॉ. लखन लाल सिंह "आरोही" ने कर्मचारियों की मांगों को जायज बताते हुए कॉलेज प्रशासन के अड़ियल रुख पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अनशनकारियों को पूर्ण सहानुभूति प्रदान करते हुए आश्वस्त किया कि वे जल्द ही इस पूरे गंभीर मामले और कॉलेज में व्याप्त विसंगतियों की जानकारी व्यक्तिगत रूप से विश्वविद्यालय के कुलपति और बांका के जिलाधिकारी से मिलकर देंगे, ताकि इस संकट का कोई त्वरित और न्यायसंगत समाधान निकाला जा सके। गौरतलब है कि कन्हैया लाल सिंह के नेतृत्व में यह पूरा आंदोलन मुख्य रूप से 4 सूत्री मांगों को लेकर चल रहा है, जिसमें कॉलेज में हुई कथित असंवैधानिक संविदा बहालियों को रद्द करने, वित्तीय अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच कराने, भूमिदाता के योग्य वंशज को नौकरी देने और भूमिदाता परिवार को शासी निकाय में सदस्य के रूप में शामिल करने की मांग शामिल है। कन्हैया लाल सिंह का कहना है कि नवंबर 2025 में मिले लिखित आश्वासन के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके कारण उन्हें दोबारा इस कठोर कदम के लिए विवश होना पड़ा है। इधर चौथे दिन कन्हैया लाल सिंह की तबीयत बिगड़ने और आंदोलन को व्यापक सामाजिक समर्थन मिलने के बाद अब जिला व विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव काफी बढ़ गया है।
रिपोर्ट :- केआर राव