रजौन,बांका :- तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध दीपनारायण सिंह महाविद्यालय भूसिया, रजौन में जारी प्रशासनिक गतिरोध और विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार (13 अगस्त) से महाविद्यालय के लिपिक कन्हैया लाल सिंह अपने दर्जनों समर्थकों के साथ कॉलेज परिसर में शांतिपूर्ण तरीके से पुनः अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। इस बार वे अजय वर्मा, मनमोहन वर्मा, पवन वर्मा, शंभूनाथ वर्मा, नंदकिशोर यादव, प्रशांत कुमार, गौतम कुमार, मनीष कुमार, गोपाल हरिजन, संतोष पासवान, रामप्रकाश यादव, रविंद्र कुमार यादव, जयराम सिंह, नीलेश कुमार सिंह, तरुण कुमार सिंह और नवल कुमार सिंह सहित कई अन्य समर्थकों के साथ 5 प्रमुख मुद्दों सहित कुल 17 सूत्री मांगों को लेकर आमरण अनशन कर रहे हैं। अनशनकारियों की मुख्य मांगों में 01 सितंबर 2023 से कॉलेज में हुई वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करना, असंवैधानिक बहालियों को रद्द कर भूमिदाताओं के योग्य वंशजों की नियुक्ति करना, शासी निकाय को भंग कर उसमें भूमिदाता सदस्यों को शामिल करना, विद्यार्थियों से कथित अवैध वसूली बंद करना और जांच पूरी होने तक प्रभारी प्राचार्य का इस्तीफा मांगना शामिल है। इसके अलावा राज्यपाल को भेजे ज्ञापन में 17 सूत्री मांगों के तहत कई गंभीर मामले उठाए गए हैं। इनमें कॉलेज के खेल मैदान पर बने कल्याण छात्रावास निर्माण की वैधता की जांच कराने, कॉलेज के दूसरी मंजिल पर बिना किसी निविदा के टिन-चदरा का शेड निर्माण कराकर भारी राशि खर्च करने, इंटर नामांकन व परीक्षा शुल्क में गड़बड़ी, बोनाफाइड सर्टिफिकेट के नाम पर अधिक राशि वसूलने, 4 करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट का सही हिसाब देने और शासी निकाय के पुनर्गठन जैसे गंभीर आरोप और मांगें शामिल हैं। दूसरी ओर विश्वविद्यालय द्वारा गठित 3 सदस्यीय जांच समिति (संयोजक प्रो. डॉ. रंजना, कुलानुशासक डॉ. मुकेश कुमार सिंह और सीसीडीसी प्रो. डॉ. एस.एन. पांडेय) ने अपनी निरीक्षण रिपोर्ट में कन्हैया लाल सिंह द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को प्रतिशोध से प्रेरित, मनगढ़ंत और असत्य करार देते हुए प्रभारी प्राचार्य को आरोप मुक्त कर दिया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार कन्हैया लाल सिंह का 'सहायक लिपिक' पद विश्वविद्यालय के पद-स्वीकृति प्रारूप (स्टाफिंग पैटर्न) में अंकित नहीं है, जिससे वे बिना पद पर कार्यरत माने गए हैं। इसके साथ ही परिसर में बिना सक्षम प्राधिकार की अनुमति के लगाए गए 36 दानदाताओं के शिलापट्ट को अवैध घोषित किया गया है और कन्हैया लाल सिंह के आचरण को सेवा संहिता के प्रतिकूल मानते हुए उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। इधर महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. महेंद्र प्रसाद सिंह ने कन्हैया लाल सिंह द्वारा लगाए जा रहे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पूरी तरह गलत व असत्य बताया है और कहा है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई से बचने के लिए कॉलेज का माहौल बिगाड़ा जा रहा है। फिलहाल, पुनः शुरू हुए इस आमरण अनशन के कारण कॉलेज परिसर में एक बार फिर तनाव का माहौल बन गया है।
रिपोर्ट:;केआर राव