बांका: गंगाधाम से बाबाधाम तक बाबाधाम तक कांवरिया का रैला कम नही हो रहा हैं।वही सुइया पहाड़ से गोड़ियारी नदी तक जंगली इलाको में साथ ही पक्की सड़क के किनारे जंगल के किनारे कांवरिया का जत्था खाना बनाते,खाते देखे जाते हैं जिससे यह नजारा पूरी तरह पिकनिक मनाने जैसा लगता हैं। पक्की सड़क के किनारे सुइया पहाड़,इनारावरण, सुग्गासार,सहित अन्य जगहों पर वाहन से आने वाले कांवरिया अपनी छोटी बड़ी वाहन को लगाकर एक साथ खाना बनाते है। औऱ पंक्ति में बैठ कर भोजन करते हैं ऐसे कांवरिया अपने घर से ही सारा सामान गेैस सहित लेकर आते हैे रास्ते सिर्फ़ लकड़ी खरीद कर खाना बनाते हैे।जबकि गोडियारी नदी में तो थके हारे कांवरिया को सबसे अधिक सकून मिलता है।गंगाधाम से चल कर पूरी तरह थकान में डूब चुके कांवरिया को इस नदी के पानी में उतरते ही सारी थकान दूर हो जाती है।इस नदी में उतर कर कांवरिया सिर्फ थकान ही दूर नहीं करते हैं बल्कि इस नदी में कलकल धाराओं के बीच लाल,पीली, हरी फाइबर की कुर्सी पर बैठ कर छोला बडोला,पूरी सब्जी सहित पक्का हुआ मक्का खाने का आनंद उठाने का आनंद ही कुछ ओर है।इस नदी और उसके आसपास के जंगलों में पूरे सावन एक पिकनिक स्पोर्ट के रूप में भी देखा जाता। है।इस नदी में सैकड़ों फोटो ग्राफर कांवरिया द्वारा उसके तरह तरह के फरमाईश पर फोटो खींचता हैं। जबकि सेल्फी का आनंद भी कांवरिया इसी नदी में उठाते हैं।इस नदी में इस बर्ष टेंट सिटी बनाने से और भी अधिक भीड़ जमा होती है लेकिन अभी भी इस नदी में शौचालय और रोशनी के अलावे सफाई की काफी जरूरत होती है।
सावन माह में पिकनिक स्पोर्ट बन जाता है गोडियारी नदी।
byआमोद कुमार दुबे
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