पुरे दिन धूम मचा रहा - बेरोजगार मेला चनपटिया में !

चम्पारण नीति / चनपटिया (पश्चिमी चम्पारण) 
            युवाओं को नियुक्ति पत्र देते हुए : विधायक
       30 अगस्त 2026 को बिहार के चर्चित चनपटिया विस क्षेत्र के युवा विधायक अभिषेक रंजन की दुरगामी सोंच एवं क्षेत्र की माँग व जरूरत अनुसार ' रोजगार मेला ' का सफल आयोजन बना जनचर्चा का विषय. साथ ही टीका- टिप्पणी सहित कई सवालों और संदेह के घेरे में.
                 रोजगार मेला में पहूँचे बेरोजगार युवा
         चनपटिया विस क्षेत्र से प्राय: सभी राजनीतिक दलो से विधायक बन विधानसभा तक पहूँचने का सुअवसर कई जन नेताओं को  जरूर मिला. लेकिन चनपटिया और चनपटिया के जनमानस को अब तक क्या मिला है जो जग जाहिर है . हर चुनावी मौसम में दल, दल के उम्मीदवारों एवं उनके समर्थकों द्वारा लोक लुभावन वायदों की भरमार होती रही है फिर वायदे ... शिलान्यास ..... उद्घाटन तक सीमित रही है और चनपटिया की न तो दशा सुधरी - नही दिशा बदली . लेकिन जन चर्चाओं अनुसार चनपटिया से जीते हुए तमाम विधायकों की तकदीर और तस्वीर तो जरूर बदल गई. चनपटिया क्षेत्र में संचालित चीनी मील, लेदर उद्योग, स्टील प्लांट, स्टार्टअप जोन सहित छोटे-छोटे घरेलु उद्योग भी धीरे-धीरे बन्द हो गये.
       इन उद्योग व कल-करखानों की बन्द होने से तथा प्रति वर्ष बाढ़-सुखाड़, खाद-बीज सहज व सरल तरीके से नही मिलने की वजह से खेती- किसानी भी घाटे की सौदा बनती गई और कर्ज की बोझ से विवश, लाचार परिवार अन्य राज्यों में रोजी-रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर होते गये.
      चनपटिया सहित समस्त बिहार बेरोजगारी का दंश दशकों से झेलते हुए सरकार एवं तथकथित गरीबों के मसीहा, विकास पुरूषों से आज भी आश लगायी हुई है. पढ़े-लिखे युवा भी नौकरी की आश में दर-बदर भटक रहे है, नौकरी के नाम पर ठगे जा रहे है. ऐसे में कथित रुप से राजनीतिक वायदों के शिकार भी होते रहे है. यह कहना कतई अतिशयोक्ति नही होगी कि देश के युवा केवल कहने के लिए " देश के भविष्य है". अब तक सरकार की ओर से भी  देश की युवाओं के लिए कोई ठोस व कारगर नीति, कार्यक्रम और कार्ययोजना तय नही हो पायी. फलस्वरूप बढ़ती आबादी के अनुपात में सरकारी/गैरसरकारी नौकरी मिल पाना भी संभव नही है. ऐसे में देश के युवा वर्ग बेरोजगार बन स्वयं को कोसते है, परिवार की प्रताड़ना, पडो़सियों व सगे-संबंधियों की असह्य ताने सह नही पाते .... परिणामस्वरूप आत्महत्या करने को विवश व मजबूर हो जाते है. यह हालात है आज देश के युवाओं की.
       ऐसे में यह देखा जा रहा है सरकार की प्रयास से भी प्रायः सभी जिलों में बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार मेला का आयोजन कर " हूनर, कौशल व योग्यता " के अनुरूप रोजगार मुहैया कराने की प्रयास शुरू की गई है. लेकिन यहाँ एक सवाल मुँह बाये खडा़ है कि क्या इन तमाम युवाओं को रोजगार बिहार में मिल रहा है या बिहार से बाहर  ... ?  क्या राज्य सरकार, विधायक, सासंद, एम.एल.सी. एवं मंत्रीगण राज्य के युवाओं की भविष्य और राज्य की सर्वांगीण विकास के लिए पलायन-बेरोजगारी पर काबू पाने के लिए पंचायत, प्रखंड, जिला और राज्य स्तर पर कोई ठोस नीति एवं कार्ययोजना अब तक बना पाई है अगर नही तो आखिर क्यों ... ?
       ऐसे में चनपटिया विधायक अभिषेक रंजन द्वारा संपन्न बेरोजगारों के बीच "रोजगार मेला" कितना कारगर व सफल सिद्ध होगा. यह कहना मुश्किल है. फिर भी यह प्रयोग व प्रयास चनपटिया सहित पुरे बिहार में चर्चा का विषय बन चुका है. आम लोगों के बीच यह चर्चा है कि काश .... !   यह प्रयास कुछ पहले शुरू हुआ होता तो शायद चनपटिया को यह दिन देखने को नही मिलता. फिर भी राज्य के तमाम जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को इस मुद्दे पर अब तो काम करने की सख्त जरूरत होगी ...!
          

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