रजौन,बांका :- फाइलेरिया (हाथीपांव) जैसी गंभीर और असाध्य बीमारी के समूल खात्मे और माइक्रो फाइलेरिया की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। इसके तहत आगामी 28 सितंबर से बांका जिले के सभी प्रखंडों में विशेष 'नाइट ब्लड सर्वे' (Night Blood Survey) अभियान शुरू किया जा रहा है। इसी क्रम में रजौन प्रखंड के तीन चयनित गांवों लहोरिया, नीमा और पुनसिया में रात्रि शिविर आयोजित कर लोगों के रक्त के नमूने लिए जाएंगे। रजौन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. ब्रजेश कुमार एवं स्वास्थ्य प्रबंधक अल्पना ने संयुक्त रूप से बताया कि यह जांच अभियान रोजाना रात 10 बजे से संचालित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि फाइलेरिया के सूक्ष्म परजीवी (माइक्रोफाइलेरिया) रात के समय ही मानव रक्त में सक्रिय होकर परिधीय संचार तंत्र में आते हैं, इसलिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नमूनों का संग्रह देर रात ही किया जाता है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि फाइलेरिया का संक्रमण शरीर में प्रवेश करने के वर्षों बाद भी कई बार कोई बाह्य लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, इसलिए जिन व्यक्तियों में कोई लक्षण नहीं हैं, उन्हें भी अनिवार्य रूप से अपनी जांच करानी चाहिए। स्वास्थ्य प्रबंधक अल्पना ने ग्रामीणों से अपील की कि स्वास्थ्य दल घर-घर और सार्वजनिक स्थलों पर कैंप लगाकर नमूने एकत्र करेगा, ऐसे में सभी ग्रामीण खुद भी जांच कराएं और परिवार व पड़ोसियों को भी प्रेरित कर क्षेत्र को फाइलेरिया मुक्त बनाने में सहयोग दें। इस अभियान की शत-प्रतिशत सफलता और तैयारियों की समीक्षा को लेकर जिला स्वास्थ्य समिति (DHS), बांका के सभागार में गुरुवार की संध्या सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक सह एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आहूत की गई। बैठक में जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी (DVBDCO) डॉ. एस दास, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी (DIO), संचारी रोग पदाधिकारी (CDO) और पीरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यशाला में जिले भर के चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC), प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक (BHM), प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक (BCM), सीएचओ (CHO), लैब तकनीशियन (LT), जीएनएम (GNM) और एएनएम (ANM) शामिल हुए। बैठक में डीवीबीडीसीओ डॉ. एस दास ने सभी कर्मियों को निर्देश दिया कि अपने-अपने प्रखंडों में 28 सितंबर से नाइट ब्लड सर्वे का कार्य निर्धारित समय पर शुरू कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि सर्वे के दौरान 20 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के रक्त के नमूने लिए जाएंगे, ताकि माइक्रो फाइलेरिया की सटीक जांच की जा सके। इस पूरे अभियान में पीरामल फाउंडेशन की टीम तकनीकी सहयोग करेगी और गतिविधियों का फील्ड में अवलोकन करेगी। सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह ने सभी स्वास्थ्य कर्मियों को मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का कड़ाई से पालन करने, शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने और व्यापक जन-जागरूकता फैलाने के कड़े दिशा-निर्देश दिए। विभाग के अनुसार अभियान की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
रिपोर्ट:- केआर राव