बगहा :
--- गंडक नदी में कटाव के नाम पर करोड़ों रुपये का प्रत्येक वर्ष होता है वारा-न्यारा
माधवेंद्र पांडेय :
नेपाल से चलकर वाल्मीकिनगर बगहा के रास्ते पिपरासी, मधुबनी, भितहा व ठकरहा प्रखंड के विभिन्न गांव से होते हुए योगापाट्टी, नौतन से गुजर कर पूर्वी चंपारण के विभिन्न हिस्सों से बहकर छपरा (सारण) जिला के सोनपुर तक जाने वाली नारायणी (गंडक) नदी अपने दोनों किनारे पर स्थित यूपी के कुशीनगर जिला अंतर्गत विभिन्न गांव व गोपालगंज जिला के विभिन्न गांव में प्रत्येक वर्ष मानसून सीजन में पानी के तेज बहाव के साथ कटाव करती रहती है। जिसके परिणाम स्वरुप प्रत्येक वर्ष कटाव व पानी का दबाव के नाम पर फ्लड फाइटिंग कार्य कर बालू भारी बोरियां व बांस बल्ला से बचाव का प्रयास किया जाता है। लेकिन, बरसात के दौरान कटाव वाले स्थलों को चिन्हित कर विभाग द्वारा कटाव रोधी व एंटीरोजन कार्य किया जाता है। बरसात समाप्त होने के बाद से पुनः शुरू होने तक लगातार एंटीरोजन व कटाव रोधी कार्यों के बावजूद भी बरसात में फ्लडफाइटिंग कार्य कर करोड़ों का वारा-न्यारा कर लिया जाता है।
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विधायक के निरीक्षण क्रम में खुली पोल : विगत दिनों बगहा दो के मंगलपुर में वाल्मीकिनगर विधायक सुरेंद्र प्रसाद ने कटाव स्थल का जायजा लेकर अभियंता दल से उसकी जानकारी ली। इसी दौरान पता चला कि वहां वर्ष 2017 से अबतक एंटीरोजन कार्य चल रहा है। दस साल से कार्य होने के बावजूद वहां फ्लड फाइटिंग करने की स्थिति बन गई। वह भी तब जब गांव वालों ने एनएच 727 जाम कर कटाव रोधी व स्थायी समाधान के लिए प्रदर्शन करने को विवश हुए।
ऐसे में आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि 10 साल से लगातार चल रहे एंटीरोजन में विभाग का कितना रुपया लगा और इन 10 वर्षों में दो वर्ष छोड़कर उससे पहले के तीन वर्ष लेकर अबतक फ्लड फाइटिंग में कितना रुपया खर्च हो गया। सोचने व विचारणीय बात यह है कि इससे आम जनमानस को क्या लाभ मिला और इस भारी भरकम नुकसान के पीछे लगे लोगों को क्या दंड दिया गया। हालांकि इस विषय के सार्वजनिक होने के बाद विधायक द्वारा विधानसभा में और उच्च स्तरीय बैठक में चर्चा करने की बात कही गई।