MCU प्रवेश प्रक्रिया पर सवाल, तनय शर्मा हाई कोर्ट जाने की तैयारी में


RTI में इंटरव्यू की स्कोर शीट संधारित नहीं होने की जानकारी का दावा, ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन बिहार प्रदेश के महासचिव आदित्य कुमार दुबे ने पारदर्शिता की मांग की

भोपाल, 6 सितंबर। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) की स्नातकोत्तर प्रवेश प्रक्रिया 2026-27 को लेकर विश्वविद्यालय के छात्र एवं NSUI के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता तनय शर्मा ने सवाल खड़े किए हैं। शर्मा ने प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और इंटरव्यू के मूल्यांकन को लेकर प्राप्त आरटीआई जवाब का हवाला देते हुए मामले को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) में शिकायत करने तथा अब मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर खंडपीठ का रुख करने की बात कही है।
तनय शर्मा के अनुसार, उन्होंने विश्वविद्यालय के एमए एमसी और एमए एपीआर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। उनका दावा है कि बेहतर अकादमिक रिकॉर्ड होने के बावजूद इंटरव्यू में उन्हें अपेक्षाकृत कम अंक दिए गए और उनका चयन नहीं हुआ। बाद में उन्हें एमए एपीआर में प्रवेश के संबंध में दस्तावेज सत्यापन के लिए ई-मेल प्राप्त हुआ।
शर्मा का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर दायर आरटीआई के जवाब में विश्वविद्यालय ने इंटरव्यू की इवैल्युएशन शीट और स्कोर शीट संधारित नहीं होने की जानकारी दी है। उनका सवाल है कि यदि इंटरव्यू के आधार पर अभ्यर्थियों को अंक प्रदान किए गए थे, तो उन अंकों के निर्धारण का आधिकारिक मूल्यांकन रिकॉर्ड कहां है और चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता का सत्यापन किस आधार पर किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि विश्वविद्यालय द्वारा जारी मेरिट एवं चयन सूची में अभ्यर्थियों के प्राप्तांक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। वहीं, आरटीआई के जवाब में इंटरव्यू पैनल के सदस्यों की जानकारी को ‘संवेदनशील विषय’ बताते हुए उपलब्ध नहीं कराने की बात कही गई। शर्मा के मुताबिक इंटरव्यू की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग भी संधारित नहीं होने की जानकारी दी गई है।

दस्तावेज सत्यापन के दौरान ‘माफीनामा’ मांगने का आरोप

तनय शर्मा ने आरोप लगाया कि 14 अगस्त को दस्तावेज सत्यापन के दौरान उनसे एक पूर्व-तैयार ‘माफीनामा’ पर हस्ताक्षर करने को कहा गया। उनके अनुसार, इस दस्तावेज में “कृपापूर्वक प्रवेश दिया जाए” जैसी भाषा लिखी थी। शर्मा ने बताया कि उन्होंने उक्त दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
शर्मा का कहना है कि उनका सवाल किसी व्यक्ति विशेष को लेकर नहीं, बल्कि पूरी प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर है। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू के आधार पर अंक दिए गए हैं तो उनका मूल्यांकन रिकॉर्ड भी उपलब्ध होना चाहिए। उनके अनुसार, प्रवेश किसी विद्यार्थी पर की जाने वाली कृपा नहीं, बल्कि निर्धारित नियमों और योग्यता के आधार पर होने वाली प्रक्रिया है।

लोकपाल से मुलाकात का समय नहीं मिलने का दावा


शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपनी शिकायत विश्वविद्यालय के लोकपाल के समक्ष रखने के लिए समय मांगा था, लेकिन उन्हें समय नहीं मिल सका। उनका दावा है कि विश्वविद्यालय में करीब चार माह से लोकपाल का पद रिक्त है। शर्मा के अनुसार, इससे शिकायत निवारण की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठते हैं।

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के महासचिव आदित्य कुमार दुबे ने कहा—पारदर्शिता पर स्थिति स्पष्ट हो

मामले को लेकर ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन बिहार प्रदेश के महासचिव एवं पत्रकार आदित्य कुमार दुबे ने कहा कि पत्रकारिता एवं संचार से जुड़े किसी भी विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि आरटीआई के माध्यम से इंटरव्यू की स्कोर शीट या मूल्यांकन रिकॉर्ड संधारित नहीं होने की जानकारी सामने आई है, तो विश्वविद्यालय प्रबंधन को इस संबंध में सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
दुबे ने कहा कि किसी भी विद्यार्थी की ओर से लगाए गए आरोपों को अंतिम सत्य मानने के बजाय संबंधित विश्वविद्यालय का पक्ष भी सामने आना चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि इंटरव्यू के आधार पर अंक दिए गए हैं, तो उनके निर्धारण की प्रक्रिया, मूल्यांकन के मानदंड और चयन की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि “शिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया केवल परिणाम जारी करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि पूरी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिस पर विद्यार्थी, अभिभावक और समाज विश्वास कर सकें। यदि किसी स्तर पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो विश्वविद्यालय को तथ्यों के साथ उनका समाधान करना चाहिए।”
दुबे ने यह भी कहा कि दस्तावेज सत्यापन के दौरान कथित रूप से माफीनामा मांगे जाने के आरोप की भी विश्वविद्यालय को स्पष्ट रूप से जांच कर स्थिति सामने रखनी चाहिए। उनके मुताबिक, यदि ऐसा कोई दस्तावेज मांगा गया था तो उसका आधार और नियम स्पष्ट होना चाहिए और यदि आरोप तथ्यहीन है तो विश्वविद्यालय को उसका खंडन करना चाहिए।

UGC में शिकायत, हाई कोर्ट जाने की तैयारी

तनय शर्मा के अनुसार, उन्होंने पूरे मामले को लेकर UGC में शिकायत प्रस्तुत कर दी है। विश्वविद्यालय स्तर पर प्रभावी समाधान नहीं मिलने की स्थिति में अब उन्होंने मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में याचिका दायर करने का निर्णय लिया है।
शर्मा पिछले करीब तीन वर्षों से MCU में अध्ययनरत होने की बात कहते हैं और इस दौरान विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि उनके द्वारा उठाए गए सवालों और शिकायतों का उनकी प्रवेश प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ा हो सकता है। हालांकि, शर्मा ने स्वयं इस आशंका को अंतिम निष्कर्ष नहीं बताते हुए स्वतंत्र जांच का विषय बताया है।
उन्होंने मांग की है कि पूरे प्रवेश प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि इंटरव्यू में अंक किस आधार पर दिए गए, चयन किस प्रक्रिया के तहत हुआ, इंटरव्यू की मूल्यांकन शीट क्यों संधारित नहीं है और दस्तावेज सत्यापन के दौरान कथित माफीनामा मांगने का आधार क्या था।
मामले में विश्वविद्यालय का पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों और आरटीआई में दी गई सूचनाओं की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।


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