नवरात्र भर पूजी जाती है मूरत जहां, आये दिन जलती है औरत वहां!
कन्या पूजन करने वाले समाज में दहेज हत्या और प्रताड़ना गंभीर चिंता का विषय
दहेज हत्या के कई मामलों में दोषियों को सजा, कई में सुनवाई जारी
माधवेंद्र पाण्डेय,
बगहा :
हर्षोल्लास के साथ नवरात्र का त्यौहार संपन्न हो गया। बुधवार को सभी पूजा पंडालों में स्थापित माता की प्रतिमा का विसर्जन भी कर दिया गया, लेकिन विगत नौ दिनों तक शैलपुत्री की पूजा के साथ मातृ पूजन करने वाले समाज के लोग अब दूसरे स्वरुप में नजर आएंगे। कहीं दहेज़ को लेकर पत्नी या पुत्रबधु की हत्या की घटना होगी तो कहीं अल्ट्रासाउंड के माध्यम से भ्रूण हत्या का कुकृत्य सुनने को मिलेगा।
नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा की आराधना, उपवास और कन्या पूजन के जरिए लोग सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। लेकिन, इसी समाज की एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि देवी की पूजा करने वाले कुछ लोग दहेज के लालच में बहू-बेटियों को प्रताड़ित करने और उनकी जान लेने तक से पीछे नहीं हटते। सवाल उठता है कि आखिर यह कैसी श्रद्धा है, जहां मंदिरों में देवी की आराधना होती है, लेकिन घरों में महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को कुचला जाता है?
दिखावे की भक्ति, वास्तविकता में भेदभाव
महानवमी पर कन्याओं के पैर धोकर उन्हें भोजन कराया जाता है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है। वहीं, दूसरी ओर बेटियों को बोझ समझने और उनके विवाह में दहेज की अपेक्षा रखने वाली मानसिकता आज भी समाज में मौजूद है। यह विरोधाभास धार्मिक आस्था और सामाजिक व्यवहार के बीच की खाई को उजागर करता है। जो निंदनीय और चिंतनीय दोनों है।
दहेज लोभ बन रहा महिलाओं की मौत का कारण
दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर महिलाओं को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। कई मामलों में यह प्रताड़ना हत्या या आत्महत्या के लिए विवश करने तक पहुंच जाती है। बगहा में सामने आए मामले इस समस्या की गंभीरता को रेखांकित करते हैं।
बगहा में कई मामलों में दोषियों को सजा
अक्टूबर 2026 में नौरंगिया थाना क्षेत्र के जरलहिया पचरूखा गांव में विनिता देवी की दहेज के लिए हत्या के मामले में न्यायालय ने सास फगनी देवी और ससुर भुट्टी राय को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास तथा 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अगस्त 2026 में भैंस और बाइक की मांग से जुड़े पत्नी की हत्या के मामले में दोषी सुभाष यादव को उम्रकैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। लौकरिया थाना क्षेत्र के पिपराडीह में विवाहिता की मौत के मामले में पति राहुल यादव को दस वर्ष और ससुर कृष्णा यादव को तीन वर्ष की सजा सुनाई गई। वहीं न्यायालय ने छः अक्टूबर को ससुर मथुरा प्रसाद, सास दयमंती देवी व पति रणजीत को अपने पत्नी को जलाकर हत्या के मामले मे दोषसिद्ध करारा दिया गया। वहीं एक अन्य मामले गोबरहिया थाना कांड 16/2025 में बहु दुर्गा कुमारी की गला दबाकर हत्या के मामले में सास ज्ञानति देवी व ससुर स्वमीनाथ मांझी का त्वरित विचारण चल रहा है। विगत दिनों न्यायालय द्वारा पति अमित पटेल को अपने पत्नी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा दी गयी। इन सभी मामलों से पूर्व वाल्मीकिनगर थाना अंतर्गत सीआरपीएफ जवान इस्माइल अंसारी को अपने पत्नी की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा दी गयी। बगहा व्यवहार न्यायालय द्वारा एक अन्य मामले में पति रंजीत राम का अपनी पत्नी की हत्या के मामले में त्वरित विचारण चल रहा है इससे पूर्व रंजीत राम को आजीवन कारावास की सजा दी जा चुकी है। एक अन्य मामले में पति प्रमोद साह का अपनी पत्नी की हत्या के मामले में त्वरित विचारण चल रहा है, जिसका इसी माह निर्णय आने की संभावना है।
बदलनी होगी सामाजिक सोच
बगहा में महिलाओं की हत्या और प्रताड़ना से जुड़े अन्य मामलों में भी न्यायिक सुनवाई जारी है। कई मामलों में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है। हालांकि, केवल कानूनी कार्रवाई से यह समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। इसके लिए समाज को अपनी सोच बदलनी होगी। देवी की सच्ची पूजा तभी सार्थक होगी, जब बहू-बेटियों को भी सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकार मिलेंगे।