यूपीएससी परीक्षा भारत की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। स्वाभाविक है कि आयोग परीक्षा के लिए कई तरह की तैयारियाँ करती हो, लेकिन हिंदी के प्रति ओच…
जवानों का जोश हाई है चीन की शामत आई है गलवान घाटी हमारी है आगे की पूरी तैयारी है गलवान को हाथ लगाओगे तो मिट्टी में दफ़न कर दिये जाओगे हम…
गहन अंधेरी रात में, लोकतंत्र है लैम्प बुझा रहे उसको मगर, जाति धर्म के कैम्प लोकतंत्र में लोक की, यही रही औकात उनके हिस्से रोशनी ,अपने हिस्स…
शहीदों की क़ुरबानी से, हुआ देश आजाद हमारा है लहराता है जब तिरंगा ,लगता कितना प्यारा है * कश्मीर से कन्याकुमारी तक,भारत को सबने संवारा है मिली आज…
टूटते, घुटते जा रहे रिश्ते प्रेम, स्नेह, भाईचारा, अपनत्व, दरकते , सिसकते जा रहे अब गांठ में उलझते जा रहे रिश्ते। संयुक्त परिवार की परिभाषा अब खत्म …
(संपादक -आदित्य कुमार दुबे)
"चम्पारण नीति " की नीति
सादगी, जबरदस्त जोश और चेहरे पर एक दृढ़ संकल्प लिए। बिना किसी लोभ व लालच अथवा किसी द्वेष के कारण नहीं, बल्कि असहाय , पीड़ितो और अत्याचारों से भरी फरियादों की, जो अनसुनी कर दी जाती है। "चम्पारण नीति " ढ़ाल बन कर उन शोषितों की पीड़ा को सबके समक्ष रखने का कार्य करेगा। निर्भीकता के साथ सरकार और उसके अधिकारियों की आलोचना,जनता की कठिनाईयों की चर्चा करने से कभी पीछे नहीं हटेगा। किसी की प्रशंसा या अप्रशंसा , किसी की प्रसन्नता या अप्रसन्नता, किसी की घुड़की या धमकी , हमें अपने सुमार्ग से विचलित न कर सकेगी । साम्प्रदायिक और व्यक्तिगत झगड़ों से "चम्पारण नीति" सदा अलग रहने की कोशिश करेगा । इसका जन्म किसी विशेष सभा, संस्था, ख्याति या मत के पालन- पोषण, रक्षण या विरोध के लिए नहीं हुआ है, किंतु इसका मत स्वतंत्र विचार और इसका धर्म सत्य होगा । मनुष्य की उन्नति भी सत्य की जोत के साथ होती है । इसीलिए सत्य को दबाना हम महापाप समझेंगे और इसके प्रचार और प्रकाश को महापुण्य!
-: आदित्य कुमार दुबे
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